कृषि पृष्ठभूमि


  • भौगोलिक क्षेत्रफल के मामले में मध्यप्रदेश 308245 वर्ग किलोमीटर के मान से देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य होने का गौरव प्राप्त है। इसमें 52 जिले, 424 तहसीलें, 313 विकास खण्ड, कुल ग्राम 54,903, कुल पंचायत 22,812 एवं कुल नगर/शहर 476 शामिल हैं।
  • मध्यप्रदेश की कुल जनसंख्या 07,26 करोड़ (Gensus of India 2011) होने से देश में 05 वें स्थान पर है। राज्य की कुल आबादी की 72 फीसदी जनसंख्या ग्रामीण होकर अजीविका के लिये कृषि पर निर्भर है।
  • अनेकता में एकता प्रदेश की अनेक बहुआयामी खूबियों में से एक है तथा अनुभव के लिये यहां की गंगा जमूनी तहजीब अपने आप में एक मिसाल है।
  • मध्यप्रदेश राज्य, भारत का ह्द्य स्थल होने से देश के सभी प्रमुख कृषि बाजारों से आसान दूरी पर स्थित है।
  • मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सभी जिला मुख्यालयों, ब्लाक, तहसील एवं ग्रामीण क्षेत्रों के मध्य सड़क मार्ग विकसित है, जो आवागमन के उपयुक्त है।
  • भारत के विभिन्न भागों को जोड़ने वाला रेल्वे मार्ग मध्यप्रदेश राज्य से होकर गुजरता है। साथ ही दिल्ली, मुम्बई, वाराणसी, नागपूर, बेंगलूरु, हैदराबाद, चेन्नई जैसे जैसे प्रमुख शहरों के हवाई अड्डों से जुड़ाव है।
  • राज्य में टेलिफोन और सेल्यूलर सर्विस उपलब्ध है तथा इंटरनेट कनेक्टिविटी आसानी से उपलब्ध है।
  • देश भर में विभिन्न मृदा के प्रकार और जलवायु के अनुसार 16 कृषि जलवायु क्षेत्र हैं, इस दृष्टि से मध्यप्रदेश राज्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है एवं इसमें 07 प्रकार की मृदा, 11 प्रकार के जलवायु क्षेत्र में 5 फसलीय क्षेत्रों का उपलब्ध होना, सभी प्रकार की फसलों के उत्पादन के लिये अनुकूल है।
  • मध्यप्रदेश राज्य में लगभग 145 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलें और लगभग 119 लाख हैक्टेयर में रबी फसलें ली जा रही है। प्रदेश की फसल सघनता 165ण्70 प्रतिशत है।
  • प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसलें सोयाबीन, धान, मक्का, तुअर ‘‘अरहर‘‘ मूंग, उड़द, ज्वार, बाजरा, तिल, कपास है साथ ही प्रमुख रबी फसलें गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों, अलसी है जबकि प्रमुख उद्यानिकी फसलों में, फलों में आम, अमरुद, केला, संतरा, पपीता वहीं सब्जीयों में आलू, प्याज, टमाटर, मटर और मसालों में धनिया, मिर्च, लहसून के अतिरिक्त फूल एवं औषधी भी शामिल है।
  • कपास एवं गन्ना हमारी प्रमुख नगद फसलें हैं।
  • मध्यप्रदेश में नर्मदा, चम्बल, ताप्ती, बेतवा, सोन, क्षिप्रा, काली सिंध और तवा जैसी प्रमुख नदियों पर भूमि की सिचाई निर्भर है।
  • मध्यप्रदेश में कृषि विपणन के लिये कुल 259 कृषि उपज मण्डी समितियां एवं 298 उपमण्डियां स्थापित हैं।
  • मध्यप्रदेश राज्य मक्का, सोयीबीन, चना, उड़द के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर एवं मूंग, मसूर, अलसी, तिल, छोटा बाजरा के उत्पादन में द्वितीय स्थान पर तथा गेहूं, जौ, रमतिल के उत्पादन में देश में तृतीय स्थान पर है वहीं कुल दलहन, कुल तिलहन में प्रथम स्थान पर जबकि कुल खाद्यान में द्वितीय स्थान पर तथा अनाज उत्पादन में तृतीय स्थान पर है।
  • प्रदेश में गेहूं, चना, मटर, मसूर, तुअर ‘‘अरहर‘‘, सरसों, गन्ना, अलसी की फसलें बहुतायत से बोई जाती है। 
  • मध्यप्रदेश राज्य उद्यानिकी फसलों अमरुद के उत्पादन में देश में द्वितीय स्थान पर, सीताफल, नींबू में तृतीय स्थान पर, पपीता में चतुर्थ स्थान पर एवं अंगूर में आंठवे स्थान पर है।
  • सब्जी उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में प्याज, फूलगोभी, ककड़ी, मिर्च, मटर उत्पादन में द्वितीय स्थान पर एवं पत्तागोभी, कद्दू, उत्पादन में तृतीय स्थान पर तथा भिण्डी, लौकी के उत्पादन में चतुर्थ आलू, करेला, शिमला मिर्च उत्पादन में पांचवे स्थान पर एवं मूली उत्पादन में सातवें स्थान पर तथा परवल उत्पादन में दसवें स्थान पर है। जबकि अन्य सब्जियों के उत्पादन में चतुर्थ स्थान में है।
  • शरबती गेहूं के मामले में आष्टा, सीहोर, विदिशा, अशोकनगर, बासमती धान के मामले में डबरा, गोहद, रायसेन, बरेली, तुअर (अरहर) में पिपरिया, नरसिंहपुर, कपास में खरगोन, बड़वानी का पपिता, मंदसौर एवं नीमच की खसखस, लहसुन, औषद्यीय उपज इसबगोल, असलिया, मसूली देश भर में प्रसिद्व है।
  • मध्यप्रदेश भारत का प्रमुख मसाला उत्पादक राज्य है। फिर चाहे मंदसौर की मेंथी, लहसून, कलौंजी हो, नीमच की खसखस हो, गुना एवं कुम्भराज की धनिया हो, बेड़िया (अंजड़) की स्पेशल मिर्च हो। प्रदेश में हल्दी एवं अदरक के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया गया है।
     

अनाज

गेहूं, ज्‍वार, मक्‍का, धान

तिलहन

सोयाबीन, सरसों, अलसी

दलहन

चना, मसूर, तुअर

सब्‍जीयॉं

हरी मटर, फूलगोभी, भिण्‍डी, टमाटर, आलू, प्‍याज

फल

आम, अमरुद, संतरा, केला, पपीता

मसाले

मिर्ची, लहसून, धनिया, अदरक, हल्‍दी